उसके वचन को पकड़ ले!

मरकुस 7 हमें एक महिला की कहानी मिलती है, जिसकी बेटी में दुष्ट आत्मा होती है। वह महिला यीशु के पास आकर उससे विनती करती है कि वह उसकी बेटी को चंगा करें, मगर प्रभु उसे कोई जवाब नहीं देता है। लेकिन वह महिला लगातार तब तक विनती करती रहती है जब तक की उसके चेले शर्म के कारण, प्रभु से विनती करते है कि उसे वहा से भेज दे। तब यीशु उस महिला से कहते है, “…पहिले लड़कों को तृप्त होने दे, क्योंकि लड़को की रोटी लेकर कुत्तों के आगे डालना उचित नहीं है।”(मरकुस 7:24)। इस उत्तर को पाने के बाद उस महिला ने कहा, “…सच है प्रभु; तौभी कुत्ते भी तो मेज के नीचे बालकों की रोटी का चुर चार खा लेते हैं”(मरकुस 7:28)। उस महिला में महान विश्वास था, जिसके कारण यीशु ने कहा, “…इस बात के कारण चली जा; दुष्ट आत्मा तेरेी बेटी में से निकल गई है”(मरकुस 7:29)।


यहा एक बात ध्यान दें! यहा पर यीशु ने शैतान से बातें नहीं की, उसने यह नहीं कहा कि “शैतान, इस लड़की में से निकल जा!” बल्कि, उसने महिला से बात करते हुए यह कहा कि “दुष्ट आत्मा तेरी बेटी में से निकल गई है।” वही तो उस महिला को चाहिए था- प्रभु के तरफ से वचन- और उस महिला ने उस वचन को विश्वास से पकड़ लिया।


ऐसी ही कहानी उस पुरूष की भी है जिसका बेटा मरने पर था। उसने आकर यीशु से बात की और प्रभु ने उससे कहा, “जा तेरा पुत्र जीवित है…” बाइबल बताती है, “…उस मनुष्य ने यीशु की कही हुई बात की प्रतीति की और चला गया”(यूहन्ना 4:50)। इसी को विश्वास कहते है; उसने प्रभु के वचन पर विश्वास किया और चमत्कार पाने के आशा से चला गया, रास्ते में उसकी मुलाकात उसके दासो से हुई और उसके दासों ने उसको यह समाचार दिया, “…तेरा लड़का जीवित है”(यूहन्ना 4:51)। बाइबल बताती है कि “उस ने उन से पूछा कि किस घड़ी वह अच्छा होने लगा उन्होंने उस से कहा, कल सातवें घण्टे में उसका ज्वर उतर गया”(यूहन्ना 4:52)। उस समय उस मनुष्य को पता चला कि यह चमत्कार उसी समय हुआ जब यीशु ने चंगाई के वचन को कहा था।


आपको अपने कठिन परिस्थिति से निकलने के लिए केवल परमेश्वर के द्वारा वचन की जरूरत हैः उस वचन को खोजे जो परमेश्वर ने आपके परिस्थिति के लिए कही है और उसको विश्वास के साथ पकड़े रहे। जब आप अपने विश्वास का प्रयोग वचन पर करते है, यह आपके लिए और आप में परिणाम लाता है- फिर आपके पास अवश्य ही गवाही होगी!

प्रार्थना और घोषणा

पिता, मैं आपके वचन पर आनन्दिंत हूँ जो मेरे वश्वास को मजबूत और मेरे कार्य को प्रभावित बना रहा है। आपका वचन ही मेरे लिए जीवन है और वह प्रकाश है जो मुझे दिन-प्रतिदिन विजय, समृद्धि और सफलता के मार्ग पर चलने का मार्ग दिखाता है। यीशु के नाम से, आमीन!

TAKE HIS WORD!

Mark 7 tells the story of a woman, whose young daughter had an unclean spirit. She cried after the Lord Jesus, imploring Him to heal her daughter, but the Master didn’t respond. She remained persistent, until the disciples were somewhat embarrassed, and besought Jesus to send her away. Jesus then said to her, “…Let the children first be filled: for it is not meet to take the children’s bread, and to cast it unto the dogs” (Mark 7:27). Undaunted by this response, she replied, “…Yes, Lord: yet the dogs under the table eat of the children’s crumbs” (Mark 7:28). The woman had great faith, which the Lord commended, saying, “…For this saying go thy way; the devil is gone out of thy daughter” (Mark 7:29).

Notice that Jesus didn’t talk to the demon; He didn’t say, “Devil, go out of the girl!” Rather, while talking to the woman, He said, “The demon is gone out of your daughter.” That was all the woman needed—a word from the Master—and she took a hold of that word by faith.

A similar story is that of a nobleman whose son was dying. He came and talked to Jesus and all the Master said was, “ Go thy way; thy son liveth….” The Bible says, “…the man believed the word that Jesus had spoken unto him, and he went his way” (John 4:50). That was faith; he took the Master at His Word and went away, expecting a miracle. On his way home, his servants met him and announced to him, “…Thy son liveth” (John 4:51). The Bible says, “Then enquired he of them the hour when he began to amend. And they said unto him, Yesterday at the seventh hour the fever left him” (John 4:52). The man then realised that the miracle took place at the same time Jesus spoke the words of healing.

All you need to come out of any predicament is a word from God: find out what He has said concerning your situation, and take a hold of His Word, standing your ground in faith. When you exercise faith in the Word, it’ll produce results in you and for you—you’ll surely have a testimony.

PRAYER & DECLARATION

Righteous Father, I rejoice today at your Word that’s building my faith strong, and influencing my actions. Your Word is my life, and the light that shows me how to walk on the paths of victory, prosperity, and success, from day to day, in Jesus’ Name. Amen.