उसके पंखो तले

यह बहुत अदभुद है कि प्रभु हमें बहेलियों की जाल से बचाता हैं। मगर भजन संहिता 91 हमें यह बताता है कि परमेश्वर चाहता है कि हम इससे भी बेहतर अनुभव में कदम रखें। पद 4 हमें यह बताता है कि “वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके परों के नीचे शरण पाएगा”। इस साधरण सी वाक्य में बहुत ही सामथ्र्यशाली सत्य छुपी हुयी है !


पुराना नियम यहुदी लोगो के लिए लिखी गयी थी, जो पंख और पर जैसे शब्द समझते थे क्योंकि ये चिजें वाचा की संदुक की ओर इसारा करती है। अगर आप तस्वीर में करूब को वाचा की संदुक के ऊपर देखे तो आपको पता चल जाऐगा की क्यों वाचा की संदुक, पुरे मंदिर के चिजों में से अधिक पवित्र थी ? इसे महापवित्र स्थान में रखा गया था जो हमारे प्रभु यीशु मसीह का प्रतीह है। यह खराब न होने वाली लकड़ी से बनी थी और उसके ऊपर सोना मढ़वाया गया था। लकड़ी उसकी पवित्र दिनता को प्रदशित करती है और सोना उसकी सिद्ध दैविकता का चिन्ह है। यीशु मसीह सौ प्रतिशत मनुष्य था और फिर भी सौ प्रतिशत परमेश्वर।

वाचा के संदुक के ठिक ऊपर ही आपको करूब मिलते है, जिसको एक सोने पर अंकित किया गया था। इसें हिन्दी में “प्रायश्चित्त का ढकन” अनुवाद किया गया है मगर इंगलीश में इसे “मर्सी सीट” कहते है जिसका अर्थ होता हैः करूणा का सिंहासन। अब इस करूणा के सिंहासन को समझने के लिए, हमें वाचा के संदुक के अंदर के चिजों को समझना जरूरी है।


वाचा के संदुक के अंदर तीन चिजें थीः पत्थर पर लिखी हुई दस आज्ञा, सोने के कटोरे में मन्ना और हारून की लाठी जो अंकुरित हो गयी थी। यह तीनों मनुष्यों के विद्रोह का प्रतिक है। परमेश्वर के स्तर के पवित्रता का बहिष्कार, परमेश्वर के प्रबंध का बहिष्कार और परमेश्वर की अगुवाई का बहिष्कार।


परमेश्वर ने इन तीनों प्रतिक को जो मनुष्य जाति के विद्रोह का प्रतिक था, उसे लेकर वाचा के संदुक के अंदर रख दिया और उसे “करूणा के सिंहासन” से ढ़क दिया। यह उसके अदभुद अनुग्रह को दिखाती है जो उसने हमारे जीवन पर प्रकट की है कि कैसे करूणा न्याय पर विजय हुआ।


यही वह स्थान है जहाँ परमेश्वर चाहता है कि मैं और आप प्रत्येकदिन जीऐं। न्याय, सजा और दोष के पंजों में नही मगर दया, करूणा और अनुग्रह के पंखों तले। यह हमारे प्रभु यीशु के साथ गहरे संबध का स्थान है; यही स्थान है जहाँ दैविक सुरक्षा है।

प्रार्थना और घोषणा


परमश्वर आपकी दया, करूणा और अनुग्रह के लिए धन्यवाद! मैं और परिवार परमेश्वर के पंखो तले छुपे हुए है। मै चाहे किसी भी परिस्थ्तिि में रहूँ हानी से न डरूंगा क्योंकि परमेश्वर ने मुझे अपने पंखो के तले छुपा रखा है। उसके पंखों के तले विश्राम, शांति, आंनद, अनुग्रह, करूणा और सुरक्षा है, जिसके लिए मैं परमेश्वर का अभारी हूँ, यीशु के नाम से, आमीन !

UNDER HIS WINGS

It is wonderful when the Lord delivers you from the snare of the fowler. But Psalm 91 tells us that God wants us to step into something even better. Verse 4 goes on to say, “He shall cover you with His feathers, and under His wings you shall take refuge.” There are so many powerful truths hidden in this simple line!

The Old Testament was written predominantly to the Jewish people, who would understand words such as “His wings” and “feathers” as pointing to the ark of the covenant. If you see  cherubim on top of the ark in the picture, you can see why of all the furniture pieces in the temple, the ark was the most holy? It was placed in the Holy of Holies and typifies our Lord Jesus Christ. It was made of incorruptible wood and overlaid with gold. The wood represents His incorruptible and sinless humanity, while the gold speaks of His perfect divinity and deity. Our Lord Jesus was one hundred percent man and yet one hundred percent God.

The lid of the ark of the covenant, where you find the cherubim, was hammered out of one solid piece of gold. It is called  “mercy seat.” To understand the significance of the mercy seat, we have to understand the contents within the ark of the covenant.

Three items were placed inside the ark of the covenant: the stone tablets on which God had inscribed the Ten Commandments, a golden pot of manna, and Aaron’s rod that had budded. The three items typify man’s rebellion—man’s rejection of God’s holy standards, man’s rejection of God’s provision, and man’s rejection of God’s appointed leadership.

God took these symbols of man’s rebellion and failure, placed them in the ark of the covenant, and covered them with His mercy seat. It’s a beautiful picture of His unmerited favor over our lives, of how mercy triumphs over judgment.

This is the secret place where God wants you and me to live each day—not under the claws of judgment, punishment, and condemnation, but under His wings of mercy, grace, and favor. This is the place of intimacy with our Lord Jesus; this is the place of divine protection.

PRAYER & DECLARATION

Thank you, God, for your mercy, compassion and grace! Me and my family are hidden under the wings of God. No matter what situation I live in, I will not be afraid of harm because God has hidden me under His wings. Under his wings rest, peace, joy, grace, compassion and protection are there, for which I am grateful to God, in the name of Jesus, Amen !